रूहानी तरक्की (04/18/2026)

अप्रैल १८, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९८१

                       रूहानी तरक्की 

अपनी रूह की गहराई की ओर दिए हो चल
वैसे नहीं रहे हो जैसे तुम थे कल
पुराने दबे हुए घाव उभर कर बाहर आते जा रहे हैं
यूँ ही नहीं अक्सर आँसू बहे हैं
भीतर और बाहर के तूफ़ान से तुम ना डरो
प्रत्येक तूफ़ान को गुरुजी के चरणों में समर्पित करो।

वे मार्गदर्शन करेंगे तुम्हारा
बनकर तुम्हारा अखंड सहारा
आ रहा है तुम्हारे जीवन में परिवर्तन
तुम्हें आगे बढ़ाने के लिए
व्याकुल हो रहा है तुम्हारा मन
आज़ाद हो पाने के लिए।

गुरुजी को याद करो
उनका दिया हुआ जाप करो
निखरेगी तुम्हारी भक्ति
मिलेगी तुम्हें शक्ति
हर घाव की पीड़ा को सहने की
केवल गुरुजी से सब कहने की
क्यूँकि तुम जान गए हो कि कोई नहीं यहाँ है अपना
जिसे तुमने समझा था अपना, वो था माया रूपी सपना।

जो होता है बीमार
उसे ही लेनी पड़ती है दवाई
जिसका साथी बिछड़ जाता है
उसे ही सहनी पड़ती है जुदाई।

जिसपर आती है मुश्किल
उसे ही करना पड़ता है उसका सामना
अक्सर रोशनी दिखती ही नहीं है
अंधकार होता है इतना घना।

तुम्हें याद नहीं है पर तुम्हारी रूह ने किया था निश्चय
कि जब वह यहाँ आएगी लेकर इस देह जा आश्रय
तो ऊँचाई की ओर बढ़ेगी
हर वह सीढ़ी चढ़ेगी
जो ज़रूरी है उन्नति के वास्ते
चाहे कठिन हों रास्ते।

इसके लिए आवश्यक है मन का पवित्रीकरण
तन और रूह का भी हो शुद्धिकरण
इसलिए जितना हो पाये गुरुजी का सिमरन
उसके द्वारा संवारते चलो तुम जीवन।

शुक्र है गुरुजी का तुम पर पहरा है तुम्हारी ज़िंदगानी में
तुम्हारे भीतर होता हुआ परिवर्तन हो रहा है गुरुजी की निगरानी में
सकारात्मक रखो अपनी विचारधारा
मिला है तुम्हें गुरुजी का सहारा
गुरुजी ने तुम्हें बख़शा है अपने सिमरन का दान
गुरुजी के सिमरन से होगा तुम्हारा कल्याण
हिम्मत रखते हुए हर सीढ़ी चढ़ो
रूहानी तरक्की की ओर बढ़ो।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

रूहानी तरक्की (04/18/2026)

जाना और माना है रब (04/17/2026)

अप्रैल १७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९८०

     जाना और माना है रब 

गुरुजी को जाना और माना है रब
गुरुजी पर छोड़ना होगा सब
तब सफ़र लगने लगेगा पहले से आसान
बेशक आते रहें जीवन में तूफ़ान।

ख़ुद में है ही नहीं वो काबिलियत
कि हो पायें तन मन से स्वस्थ
कि काट पायें अपने कर्म समस्त
कि मिटा पायें अपनी हैसियत।

गुरुजी तो स्वयं हैं खुदा
उनके लिए हम नहीं हैं उनसे जुदा
उन्हें सर्वसमर्पण करने में है हमारा कल्याण
फिर भी ये करने से क्या हमें रोक लेता है हमारा अभिमान?
या फिर गुरुजी पर हमें विश्वास नहीं है पूरा?
या फिर हमारा भक्ति भाव है अधूरा?

गुरुजी ने बुलाया है अपने दर पर
ये है उनकी मेहर
उन्हें सर्वसमर्पण ना करना होगी ग़फ़लत हमारी ओर से
क्यूँकि केवल गुरुजी देख सकते हैं हमारी हर परेशानी को गौर से
और कोई भी नहीं देख या जान सकता हमारी मजबूरी
इसलिए गुरुजी को सर्वसनर्पण कर मिटानी होगी उनसे हर दूरी।

गुरुजी से किसी भी प्रकार की दूरी होगी जब तक
गुरुजी की प्राप्ति नहीं हो सकती तब तक
इसमें नहीं है तनिक भी शक
इसलिए इसके लिए जाना होगा किसी भी हद तक
बल्कि फिर हद के भी पार
ताकि गुरुजी संग हो जायें एकाकार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

जाना और माना है रब (04/17/2026)

बेइंतहा प्यार (04/16/2026)

अप्रैल १६, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७९

                          बेइंतहा प्यार 

संसार की हर वस्तु, व्यक्ति, और स्थान
बनता है आध्यात्मिक जीवन में इम्तहान
विकारों के ग़ुलाम बन जाना नहीं मजबूरी है
बल्कि अपने गुरु की आज्ञा में रहना ज़रूरी है।

गुरुजी ही लेते हैं इम्तहान
गुरुजी ही करते हैं फ़ैसला
गुरुजी को है हर इंसान की पहचान
गुरुजी सदा करते हैं सबका भला।

गुरुजी की याद बख्शती है वो चेतना
जो रखती है हमें सतर्क
गुरुजी की याद बख्शती है वो मस्ती
कि कोई क्या सोचता है ना पड़े फ़र्क़।

क्यूँकि गुरुजी की पसंद मायने रखती है हर काम में
गुरुजी की याद संग रहती है काम में और आराम में
गुरुजी ख़ुश रहें हम से, यही जीवन का उद्देश्य जाये बन
गुरुजी को ही अर्पित करते रहें हम अपना हर करम
और गुरुजी पर ही केंद्रित रहे जीवन का हर क्षण
तो इधर उधर भटके ही ना ये मन।

गुरुजी के चरणों में हर इम्तहान और निर्णय
गुरुजी के चरणों में ही हर श्वास की लय
जाने की ज़रूरत ही नहीं यहाँ वहाँ
गुरुजी के चरणों में मिल जाये वो जहाँ
जिसका रूह को है इंतज़ार
जिस से रूह को है बेइंतहा प्यार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

बेइंतहा प्यार (04/16/2026)

जब से मन में गुरुजी पधारे (04/15/2026)

अप्रैल १५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७८

               जब से मन में गुरुजी पधारे 

जब से मन में गुरुजी पधारे
हो गए मेरे तो वारे न्यारे
मेरा जीना मरना सब है उनके सहारे
कृतज्ञ हूँ मैं कि उन्होंने बुलाया अपने द्वारे।

गुरुजी सर्वशक्तिमान
आसन पर हुए विराजमान
झुकने लगा आसमान
करते हुए उनका गुणगान।

गुरुजी ने की कृपा अपरम्पार
मेरे मन को शिवालय बना दिया
शिवालय में बरसने लगा उनका प्यार
उज्जवल हुआ उनके नाम का दिया।

दिये की रोशनी का रूप हुआ रूहानी
शिवालय में गूँजने लगी गुरबानी
गुरुजी ने अपने चरणों में बिठाया
बड़े प्रेम से प्रसाद छकाया।

गुरुजी ने डाली मुझ पर अपनी दृष्टि
शिवालय में हुई अमृत की वृष्टि
शिवालय महकने लगा गुरुजी की खुशबू से
गुरुजी के लिए शुक्राना निकला रूह से।

मेरा रोम रोम गद गद हो गया
तन हुआ अस्तित्वहीन, मैं गुरुजी में खो गया
मन रूपी शिवालय में सुनायी दिया “ओम नमः शिवाय” का जाप प्रबल
यूँ लगा जैसे कई जन्मों से चल रहा कोई यज्ञ हुआ हो सफल।

ऐसा अनुभव होता है अक्सर
गुरुजी संग समा बिताने पर
गुरुजी की हुई असीम नदर
पाप कि शिवालय बना भीतर।

लागी रहे सिमरन की मीठी प्यास
बढ़ता रहे गुरुजी पर विश्वास
गुरुजी से है ये मुझ नाचीज़ की अरदास
कि इस शिवालय में सदा रहे उनका वास।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

जब से मन में गुरुजी पधारे (04/15/2026)

चेतना का एकाकार (04/14/2026)

अप्रैल १४, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७७

        चेतना का एकाकार 

एक ही चेतना के स्वरूप हैं हम
बस, अलग अलग शरीर में लेते हैं जनम
लेकिन जब तक अहंकार ना हो जाये चूर चूर
तब तक महसूस करते रहेंगे स्वयं को इक दूजे से दूर।

यही तो है राज़ भीतर की निशा का
चाहिए दरस दिशा का
गुरुजी दिखा रहे हैं दिशा
जिसकी ओर चल कर मिट जाएगी ये निशा।

यूँ हो जाये गुरुजी और उनकी याद से प्यार
कि कोई प्रतिकूल ख़याल हो ही ना स्वीकार
ख़ुद की ख़ामियों की ओर जागृत करे गुरबानी
स्वयं सुधार में बीतने लगे ज़िंदगानी।

सार्वभौम चेतना की अभिन्नता
देखना और जान-ना शरीर के पार
मान-प्रतिष्ठा के पार, माया के पार
इसके लिए अनिवार्य है गुरुजी की कृपा अपरंपार
वरना जन्म मरण भोगना पड़ेगा बारम्बार
इसलिए गुरुजी से अरदास है बार बार
कि उनकी कृपा से आए वो कल
जब चेतना का सूरज हो इतना प्रबल
कि उनका रूप सब में दिख जाये बाहरी रूप के पार
और चेतना का एकाकार हो पाये स्वीकार।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

चेतना का एकाकार (04/14/2026)

तो फिर किस बात का गम है? (04/13/2026)

अप्रैल १३, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७६

             तो फिर किस बात का गम है?

तुम्हारे साथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे नाथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
जानें बात हर गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
हरि भी, हर भी हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?

तुम्हारी राहों पर हर पल
गुरुजी की होती है नज़र
वे तो सर्वज्ञानी हैं
बरसाते हैं वे नदर
मेहर बरसाते हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे साथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?

जानो तुम या ना जानो
गुरुजी जानें सब कुछ ही
जो कही भी हो ना उनसे
वे तो जानते हैं वो भी
ख़ुद भगवान हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे साथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?

तुम तो डूब ही जाते
उन्होंने ही बचाया है
तुम गिर भी गए जब जब
उन्होंने ही उठाया है
रक्षा करते हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे साथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?

ना भूलो करना उनका शुक्र
उन्होंने हर श्वास है दिया
तुम्हारी गलतियों के लिए
तुम्हें माफ़ भी है किया
बख्शनहार हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तारनहार हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे साथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे नाथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

तो फिर किस बात का गम है? (04/13/2026)

ज़रूरत है… (04/12/2026)

अप्रैल १२, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७५

              ज़रूरत है…

परम पूज्य गुरूवर,

ज़रूरत है निरंतर आपकी दया की नज़र की
ज़रूरत है निरंतर आपकी नदर की
रुक सी गई है गति सफ़र की
बहुत ज़रूरत है निरंतर आपकी मेहर की।

भीतर है ये एहसास
कि आपकी मेहर से ही चल रहा है श्वास
किंतु इतना सता रहा है मुश्किलों का तूफ़ान
कि दिखता नहीं इसके थमने का नामोनिशान
अब और सहा नहीं जाता है
मन चैन नहीं पाता है
आपकी चुप्पी सही नहीं जाती है
आपको देखकर आँख भर आती है।

आप तो सब कुछ करने में हैं समर्थ
कारज नहीं हो रहा, इसका ज़रूर होगा कोई अर्थ
आप जानते हैं वह कारण, और कोई नहीं
आप जानते हैं ये भी कि मैं कब से अच्छी नींद सोई नहीं।

मुझे इतनी परेशानी है, तो आप हाँगे मुझ से ज़्यादा परेशान
आख़िरकार, मैं हूँ आपकी संतान
जानती हूँ कि बहुत कमी है मेरी भक्ति में
ये भी जानती हूँ कि कोई कमी नहीं आपकी शक्ति में
क्यूँकि आप परमेश्वर हैं
आप सर्वेश्वर हैं।

ना जानूँ अगर मैं योग्य भी हूँ आपके प्यार और लाड़ की
इसलिए विनती ही समझ लीजिये अपनी इस औलाद की
आपने सदा संभाला है, मैं हूँ शुक्रगुज़ार
आप ही ले चलेंगे प्रारब्ध के भार के पार
बख़्श दीजिए, ओ बख़्शनहार
मदद कीजिए मेरी, ओ मददगार
मैं निमाणी, आप दानी
मैं पापी प्राणी, आप मेरे स्वामी।

मैं क्यों जाऊँ और कहीं
आपके दर पर हैं मेरे आसमाँ और ज़मीन
और मुझे है यकीन
कि मेरा कल्याण होगा यहीं,
आपके चरण में
आपकी शरण में
इसलिए झुका कर अपना सिर यहीं पर
आपसे माँगती हूँ श्रद्धा और सबर
वरना काँच की गुड़िया की भाँति मैं टूट कर बिखर ना जाऊँ कहीं
आपने अपने चरणों में स्थान दिया मुझे, अब कृपा कर मुझे रहने दीजियेगा यहीं।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

ज़रूरत है… (04/12/2026)

मन के असीम आसमान में (04/11/2026)

अप्रैल ११, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७४

  मन के असीम आसमान में

जीवन की दास्तान में
मन के असीम आसमान में
अनगिनत सोच विचार के बादल टहलते रहते हैं
और भीतर के नैन उन्हें देखते रहते हैं।

बादलों की भाँति ही
अक्सर कुछ विचार
इक दूजे में समा कर अस्तित्व खो देते हैं
और एक नए बादल रूपी विचार का रूप ले लेते हैं।

यूँ ही चलता जाता है सिलसिला
कि इक बादल दूजे किसी बादल से मिला
बादलों का रूप बदलता जाता है
आसमान सबको अपने आँचल में समाता है।

बादल कभी कभी जाते हैं बरस
विचार भी कर्म बन जाते हैं अक्सर
कभी बादल हो जाते हैं ओझल
आसमान बादलों से वंचित लगता है उस पल
जैसे विचारशून्य मन लागे उस क्षण
जब विचारहीनता बेपरवाही जाती है बन।

लेकिन कभी कभी जो बादल हो जाते हैं गर्भस्थ
मानो मन विचारों के चक्रव्यू में हो गया हो अस्वस्थ
बादल घने होकर काली घटा बन जाते हैं फिर
वैसे ही मन होता है अशांत और अस्थिर।

मन रूपी आसमान
मिटाए अपनी थकान
अनिवार्य है ये
ज़रूरी कार्य है ये
ताकि वह विचार रूपी बादलों को संभाल पाये
और उनके कारण वो अस्वस्थ ना हो जाये।

बहुत ज़्यादा सोचने से हो सकती है हानि
जिस साधक ने ये सच्चाई जानी और मानी
उसने चल लिया पहला कदम मन की स्थिरता की ओर
और इस स्थिरता में ही है साधक के लिए भोर।

एकाग्र कर स्वयं को गुरुजी के चिंतन में
अन्य विचारों के बादल कम होंगे मन में
बढ़ता रहेगा मन रूपी आसमान का बल
पहले से ज़्यादा स्थिर होता जाएगा उसका आँचल।

विचारों पर होने लगेगा मन का नियंत्रण
व्यर्थ की सोच होने लगेगी कम
जो विचार आयेंगे भी, उनसे नहीं बिगड़ेगा मन का संतुलन
गुरुजी के विचारों से खिलता रहेगा मन।

ऐसा मन रूपी आसमान कल्पना नहीं बल्कि है हकीकत
साधक को करना होगा निरंतर गुरुजी की याद में रहने का प्रयास
आइये, हम भी गुरुजी महाराज से करें अरदास
कि हमें केवल उनके विचार ही लागें खास
उन्ही में रमा रहे ये मन
तो बना रहेगा मन का संतुलन
मन में घर ना बना पायेंगे व्यर्थ के विचार
तो हर जन और जन के मन का हो जाएगा उद्धार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

मन के असीम आसमान में (04/11/2026)

कर लो तय (04/10/2026)

अप्रैल १०, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७३

              कर लो तय 

कर लो तय
कि हो जाओगे गुरुमय
मिट जाएगा भय
मिट जाएगा संशय
जीवन में आएगी ऐसी लय
कि रहोगे गुरुजी में तन्मय।

गुरुजी में तन्मय रहना ही है उपाय
अगर चाहते हो कि कोई कष्ट ना सताय
क्यूंकि कष्ट तो आयेंगे जीवन में
कुछ वक्त लेंगे, कुछ कटेंगे क्षण में
पर जब तक मग्न रहोगे गुरुजी के चिंतन में
कोई भी प्रतिक्रिया घर नहीं बना पाएगी तुम्हारे मन में।

बहते पानी की भाँति कष्ट आकर बह जायेंगे
तुम्हारी हिम्मत और सहनशीलता को कम ना कर पायेंगे
गुरुजी में तन्मय रहकर तुम्हारा मनोबल रहेगा सलामत
चाहे आ जाये जीवन में बड़ी से बड़ी क़यामत।

इसलिए दृढ़ कर लो निश्चय
कि गुरुजी में रहना है तन्मय
ताकि बेशक आ जाये प्रलय
तुम होगे निर्भय।

गुरुजी से करो अरदास
कि तुम्हारे हर श्वास में हो उनका निवास
गुरुजी देंगे तुम्हें अभय दान
तुम बस, उनका कहना लो मान।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

कर लो तय (04/10/2026)

तेरे भीतर (04/09/2026)

अप्रैल ९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७२

                 तेरे भीतर

सनातन सुख है तेरे भीतर
तू उसे स्वीकार कर
कर उसका आलिंगन
शांत हो जाएगा तेरा मन।

मन को करने के लिए शांत
बहुत ज़रूरी है एकांत
गुरुजी संग वक्त गुज़ार
वे ही करायेंगे भवसागर से पार।

ज़रूरत नहीं कोई अल्फ़ाज़ कहने की
ज़रूरत है बस गुरुजी के चिंतन में रहने की
मन ही मन में उनसे होती रह सकती है बात
क्यूंकि मालिक तो सदा हैं साथ
ये सनातन सुख नहीं तो और क्या है
ये गुरुजी की ही दया है।

गुरुजी की दया का कर सत्कार
एक वे ही करते हैं तुझसे निस्वार्थ प्यार
मन में जितना बसने देगा तू संसार
उतना ही तड़पेगा तू बार बार
गुरुजी को बसा लिया जो मन में
तो और कोई नहीं चाहिए जीवन में
बाक़ी सब केवल फ़र्ज़ है, इक क़र्ज़ है
हर पल उसे अदा करता चल
और गुरुजी में मन को मग्न कर
सनातन सुख को पा अपने भीतर।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

तेरे भीतर (04/09/2026)